पश्यन्ती : इकतीस
धारावाहिक उपन्यास (अंतिम किस्त) - राम बाबू नीरव धनंजय फिर चार दिनों तक नजर नहीं आया. संध्या की उन तीखी बातों का उस पर क्या प्रभाव पड़ा, इस...
पश्यन्ती : इकतीस
धारावाहिक उपन्यास (अंतिम किस्त) - राम बाबू नीरव धनंजय फिर चार दिनों तक नजर नहीं आया. संध्या की उन तीखी बातों का उस पर क्या प्रभाव पड़ा, इस...
मैं बिंदी हूँ, मौन की ज्वाला
माथे पर चुप बैठी मैं, जैसे चाँदनी का एक बिंब – किंतु पूछते हो मुझसे, “तुम हो कौन, इस रंग में लिपटी?” मैं तो चुप थी वर्षों से, मौन की ज्वाला ...
रिश्तों में फूल खिले — जब सास-बहू बने माँ-बेटी
- महिमा सामंत जहाँ स्नेह होता है, वहाँ संबंध जन्म लेते हैं। रिश्ते खून से नहीं, भावनाओं से बनते हैं — और जब सास बहू को बेटी की तरह अपना ले...
वर्तमान में व्यंग्य लेखन के मानक
- विवेक रंजन श्रीवास्तव व्यंग्य लेखन साहित्य की वह विधा है जो समाज के अंतर्विरोधों, विसंगतियों और विद्रूपताओं को उजागर करती है। यह महज़ हँस...
मित्रता दिवस पर एक कविता
रूखे -मन को, सरस - स्नेह से - पग - पग सींचे, मित्र वही है। तप्त - हृदय को, नेह दिखाकर - दु:ख को भींचे, मित्र वही है। मित्र हो सच्चा, पक्...
जनता की बात नहीं सुनते संपादक, फिर किसके लिए हैं अखबार?
जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता से संवाद बंद कर दे और सत्ता का दरबारी बन जाए, तब पत्रकारिता दम तोड़ने लगती है। आज बड़े संपादक आम आदमी से क...
साहित्यकार सत्कार आपके द्वार योजना के अन्तर्गत अल्लापुर में किया गया तीन वरिष्ठ साहित्यकारों का सारस्वत सम्मान
प्रयागराज (सांस्कृतिक संवाददाता)। उत्कृष्ट साहित्यिक पुस्तकों के प्रकाशक साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा विगत वर्ष से चलाई जा रही स...