गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के सूत्रधार : चैतन्य महाप्रभु
भक्तिकाल के कवि और संत -रामबाबू नीरव भारत में भक्तिकाल के प्रणेता महाकवि जयदेव को माना जाता है और उस भक्ति काल की बुनियाद (नींब) को मजबूती प...
गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के सूत्रधार : चैतन्य महाप्रभु
भक्तिकाल के कवि और संत -रामबाबू नीरव भारत में भक्तिकाल के प्रणेता महाकवि जयदेव को माना जाता है और उस भक्ति काल की बुनियाद (नींब) को मजबूती प...
वृहद वृक्षारोपण योजना संचालित
बाराबंकी। धरती पर हरियाली बढ़ाने तथा मानव जीवन को स्वस्थ सुखी बनाने हेतु वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय भयारा रोड, मसौली ने वृहद वृक्षारोपण योजन...
प्रेमचंद की 145 वीं जयंती पर आयोजित विचार गोष्ठी
बाराबंकी। गरीब, निर्धन एवं महिलाएं ही देश की संस्कृति के संवाहक रहे हैं। प्रेमचंद के साहित्य में ऐसे ही पात्रों के माध्यम से संस्कृति को जीव...
स्वतंत्रता सेनानी साहित्यकार रमाकांत श्रीवास्तव की 103 वीं जयंती के उपलक्ष्य में साहित्योत्सव का आयोजन
लखनऊ। 14 जुलाई को स्वतंत्रता सेनानी साहित्यकार रमाकान्त श्रीवास्तव की 103 वीं जयन्ती की पूर्व संध्या पर 'डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव साहित्य...
महाकवि विद्यापति एवं उनकी कृतियाँ
भक्तिकाल के साहित्यकार और संत -रामबाबू नीरव संभवतः महाकवि विद्यापति भक्तिकाल के प्रथम ऐसे कवि हुए हैं जिनकी प्रशंसा से अधिक आलोचना हुई है. अ...
देवलोक का अमृतकाल बनाम मृत्युलोक में मानवता का पतनकाल
देवराज इंद्र की सभा लगी हुई थी। सभी देवगण एकत्रित हुए थे , सभी अपने देवत्व स्वरूप काया और इंद्रलोक की माया की चकाचौंध में फूले नहीं समा रह...
करेले का जूस
हास्य व्यंग रचना "सुनो, ये करेले का जूस बना दिया है, पीकर जाना," घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकला ही था कि पीछे से श्रीमती जी की...