व्यंग्य रचना: चूहों का आतंक
सरकारी दफ़्तर-सा था... नहीं-नहीं, सरकारी दफ़्तर ही था... अब आप कहेंगे, कौन-सा दफ़्तर? भई, मुझे तो सब दफ़्तर एक जैसे ही नज़र आते हैं। दफ़्तरो...
व्यंग्य रचना: चूहों का आतंक
सरकारी दफ़्तर-सा था... नहीं-नहीं, सरकारी दफ़्तर ही था... अब आप कहेंगे, कौन-सा दफ़्तर? भई, मुझे तो सब दफ़्तर एक जैसे ही नज़र आते हैं। दफ़्तरो...
ओये होये टमाटर.....
व्यंग्य - ऋतु गुप्ता आज सुबह-सुबह ही जैसे श्रीमती जी ने जैसे बम फोड़ दिया और बोली देखो जी आज आपकी छोटी बहन और हमारी छोटी नन्द की जेठानी...
क्या गुरु जी नहीं रहे (हास्य व्यंग्य)
(विशेष : कृपया इस रचना को मनोरंजन या मेरी तरह कम बुद्धि के हों तो ज्ञानवर्धन के लिए पढ़ें ) क्या गुरु जी नहीं रहे ? अरे यह कब और कैसे हुआ ? अ...
सावन को जाने दो (हास्य व्यंग्य)
कहने को तो सावन आ गया, इस बार तो वैसे भी जल्दी ही आ गया। आलोकतांत्रिक परंपरा से — इससे पहले कि सावन के स्वागत की तैयारियाँ कर पाते — सावन घु...
चाह-पुराण : पीयूष त्रिपाठी
व्यंग्य लेख आजुइ सबेरे पता लाग कि आजु तौ चाय-दिवस है। "चाय" का हमरे गांव मा "चाह" कहा जात है। कुछ जने छिन-छिन मा चाह पि...
देवलोक का अमृतकाल बनाम मृत्युलोक में मानवता का पतनकाल
देवराज इंद्र की सभा लगी हुई थी। सभी देवगण एकत्रित हुए थे , सभी अपने देवत्व स्वरूप काया और इंद्रलोक की माया की चकाचौंध में फूले नहीं समा रह...
करेले का जूस
हास्य व्यंग रचना "सुनो, ये करेले का जूस बना दिया है, पीकर जाना," घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकला ही था कि पीछे से श्रीमती जी की...
व्यंग्य की चिकोटी काटती अद्भुत पुस्तक लो बिक गया जमीर
समीक्षा वरिष्ठ साहित्यकार Pramod Tambat जी की नवीनतम व्यंग्य संग्रह " लो बिक गया ज़मीर" प्रकाशित हो चुकी है...इस पुस्तक की भूमिक...
ज्ञान चतुर्वेदी का आलेख : इसलिए व्यंग्य…
इस विषय को कई तरह से देखा जा सकता है. क्या हमसे यह कैफियत मांगी जा रही है कि व्यंग्य किसलिए? वैसे इन दिनों बहुत सारा व्यंग्य ऐसा लिखा भी...