मित्रता दिवस पर एक कविता
रूखे -मन को, सरस - स्नेह से - पग - पग सींचे, मित्र वही है। तप्त - हृदय को, नेह दिखाकर - दु:ख को भींचे, मित्र वही है। मित्र हो सच्चा, पक्...
मित्रता दिवस पर एक कविता
रूखे -मन को, सरस - स्नेह से - पग - पग सींचे, मित्र वही है। तप्त - हृदय को, नेह दिखाकर - दु:ख को भींचे, मित्र वही है। मित्र हो सच्चा, पक्...
जनता की बात नहीं सुनते संपादक, फिर किसके लिए हैं अखबार?
जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता से संवाद बंद कर दे और सत्ता का दरबारी बन जाए, तब पत्रकारिता दम तोड़ने लगती है। आज बड़े संपादक आम आदमी से क...
साहित्यकार सत्कार आपके द्वार योजना के अन्तर्गत अल्लापुर में किया गया तीन वरिष्ठ साहित्यकारों का सारस्वत सम्मान
प्रयागराज (सांस्कृतिक संवाददाता)। उत्कृष्ट साहित्यिक पुस्तकों के प्रकाशक साहित्यांजलि प्रकाशन प्रयागराज द्वारा विगत वर्ष से चलाई जा रही स...
एक बार विधायक, उम्रभर ऐश!
एक कर्मचारी 60 साल काम करने के बाद भी पेंशन के लिए तरसता है, जबकि एक नेता 5 साल सत्ता में रहकर जीवनभर पेंशन पाता है। यह लोकतांत्रिक समानता क...
स्क्रीन का शिकंजा: ऑस्ट्रेलिया से सबक लेता भारत?
ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए यूट्यूब समेत सभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक फैसला लिया है। यह कद...
पश्यन्ती : तीस
धारावाहिक उपन्यास -राम बाबू नीरव दोपहर का समय था फिर भी ठंड काफी थी. प्रातः काल से ही घने कोहरे के कारण भगवान भास्कर का दर्शन नहीं हो पा...
सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं पढ़ते राजनेताओं के बच्चे
जब तक विधायक, मंत्री और अफसरों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते रहेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों की हालत नहीं सुधरेगी। अनुभव से नीति बनती है, और ...