संस्मरण: डॉ॰ अरुण कुमार शास्त्री
पनो का संसार अद्भुत है, मेरे सपने या आपके सपने, स्वप्नों का नियम क़ानून से कोई लेना देना नही, सपनो का उम्र से भी कोई लेना देना नही, रंग रूप, जाति, देश, शिक्षा, से भी कोई लेना देना नही, सपनो की दुनिया का आर्थिक, सामाजिक विश्लेषण भी नही किया जा सकता, मेरे सपने भी इसी वर्गीकृत समीकरण के दृष्टिकोण से ओत प्रोत थे, मॉरीशस के लिए परिकल्पना परिवार ने स्नेह पूर्वक जिस पल मुझे स्वीकार कर लिया सच मानो, प्रभु के चरणों की धूल मिल गई।

हुआ यूँ था, वो ये है कि * कैसे कहूँ, कि मैं बहुत भावुक इन्सान हूँ ऐसे इन्सान के मित्र नही होते हैं, पारिवारिक सम्बन्ध भी येन केन नामचारे को, फिर भी संकोच को त्याग मैने बहिन, डॉ प्रभा, आगरा, से अपनी इच्छा कह डाली, उन्होंने कहा डॉ॰ रवीन्द्र प्रभात जी इसके कर्ता धर्ता हैं, यह कहकर उन्होने उनका मोबाइल नंबर दिया और बाकी सब काम प्रभात जी ने किया हम तो उनकी परिपक्व प्रशासनिक व्यवस्था के आधीन निर्विघ्न यात्रा कर भी आये।

मॉरीशस से मेरा बरसों पुराना पारिवारिक सम्बन्ध है, मेरे ज्येष्ठतम बहनोई सपरिवार मॉरीशस में 3 वर्ष अरविन्द टेक्सटाइल यूनिट के अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहे थे बाद में वे लेगोस , नाइजीरिया चले गए थे व् मेरे एक मित्र विंग कमांडर अरुण कॉल भी इसी मिल में सर्वोच पद पे आसीन रहे थे।

मॉरीशस की भूमि वातावरण रूप रंग हवा पानी धुप, सब का सब आपके तन मन आत्मा को सुहाता है, मॉरीशस की खुशबू का सौंधापन आपको मानवीय गुणों से भर देता है और सबसे महत्व की बात तो ये की हम सब अपनी मातृ भाषा हिंदी के प्रचार से सम्बंधित कार्य हेतु इस धरती पे आये, हिंदी के क्षेत्र में अग्रिणी साहित्य कारों का सम्मान इस धरती पे किया गया मुझे इस उत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिला मैं स्वयं को भाग्यशाली समझता हूँ।

मॉरीशस में तीन प्रकार से मेरा सांसारिक ज्ञान द्विगुणित हुआ
परिवर्तनीय, धारणीय व् व्यवहारणीय
1. एकला मत चलो- क्योंकि मैं अकेला चलूँगा तो शायद कुछ कुछ सीख पाऊंगा लेकिन संघ में चलूँगा तो बहुत कुछ सीख पाऊंगा।
2.संघे शक्ति कलेयुगो - क्योंकि मुझ अकेले की शक्ति बहुत कम है और हम सब की शक्ति हमेशा से बहुत अधिक है।
3. नारी तुम केवल सबला हो - क्योंकि नारी के समकक्ष कोई हो ही नही सकता, एक एक परिच्छेद, एक एक पल इस यात्रा में जहाँ नारी का वर्चस्व न दिखा हो मुझे याद आता ही नही है।
* घर से चला तो महिला प्रतिभागी के साथ , उनकी गाड़ी में।
* उड्डयन स्थल पर , वायुयान में, व्यवस्था हेतु कॉन्ट्रैक्ट ट्रांसपोर्ट में , होटल में , मंच संचालन व्यवस्था में, वायुमंडलीय सुगंध में सुंदर रमणीय स्थलों में, तुम ही तुम ...... नारी तुम केवल सबला हो - मेरा चरण स्पर्श स्वीकार कर अनुग्रहित करें .......।

मॉरीशस की गलियों से गुजरते हुये जो मैंने देखा वह मेरे लिए विदेश की धरती पर एक छोटे से भारत की अनुभूति करा रहा था। घर-घर में मंदिर, घरों के अंदर सरस्वती, कृष्ण, महावीर स्वामी, गांव-गांव मंदिर. जिधर देखो उधर भोजपुरिया हैं। सबके घर में कारें हैं। टोयोटा कारें, अन्य वाहन, हर घर में गांधी की तसवीर है। यहां हल्दी, बैंगन, प्याज, लहसुन, चावल, टमाटर, कोहड़ा, लौकी, भिंडी, पपीता, लीची, नींबू, लागैन (सब्जी) सब देखकर मन मयूरी नाचने लगी थी बरबस। गांव के बाहर काली मंदिर, गांव में घरों के बड़े-बड़े गेट नहीं, न कहीं मजबूत बाउंड्री. पता चला, क्राइम रेट वहां कम है।

और क्या बताऊँ मैं तो यहाँ की फिजा में मानो खो ही गया था। शांत समुद्र तट, शांत सफेद रेत, प्यारे मुस्कुराते स्थानीय लोग। वहाँ के लोग बताते हैं कि यह देश दिल्ली के सिर्फ 1.5 गुना बड़े आकार का है, इसमें साहसिक, संस्कृति विविधता और स्थानीय व्यंजनों की मात्रा यहाँ की यात्रा करने वालों के लिए पर्याप्त है। मैं तो दीवाना हो गया यहाँ की सांस्कृतिक विविधता को देखकर। सचमुच मॉरीशस स्वर्ग की अनुभूति कराता हुआ देश है जो हमारी यात्रा विकल्पों के बावजूद, बहुत कुछ दे गया है हमें। दूर-दूर तक फैले सफ़ेद समुद्र तट सपनों सा सुंदर दिखाता हैं। सफ़ेद रेत से चमकते इसके तट आराम करने के लिए अनंत संभावनाएँ और सप्ताहांतों में स्थानीय लोगों से मिलने-जुलने के व्यापक अवसर मुहैया कराते हैं। अधिकांश सार्वजनिक तट तैरने के लिए आदर्श हैं। मॉरीशस का उत्तरी भाग वाटर स्पोर्ट्स जैसे वाटर स्कीइंग, विंड सर्फिंग, सेलिंग, गहरे जल में मछलियाँ पकड़ने और पैरासेलिंग आदि के लिए प्रसिद्ध है। शाम को यहाँ के बार, रेस्तरां और क्लब जीवंत हो उठते हैं जहाँ से आप सूर्यास्त का नज़ारा भी देख सकते हैं। 

पूर्वी हिस्सा अधिक हरा-भरा और अल्पविकसित है जिसकी वजह से यहाँ पर आपको प्रकृति पूरे रंग में दिखती हैं। पालमार और बैलमार के सफ़ेद समुद्र तट बहुत ही सुरम्य हैं। दक्षिण पूर्व अपने ऊँचे चट्टानों के लिए मशहूर है जहाँ से द्वीप के दक्षिणी सिरे की ओर जाने पर आपको ख़ूबसूरत नज़ारे दिखते हैं। यहाँ पर चट्टानों के बीच के दरारों से खुला समुद्र ज़मीन तक आ जाता है और चट्टानों से टकराते हुए एक स्वप्निल दृश्य उत्पन्न करता है।पश्चिमी तट में आप अद्भुत सूर्यास्तों और गहरे जल में मछली पकड़ने का आनंद उठा सकते है। सर्फरों को टेमेरिन जाना चाहिए जो मॉरीशस का सर्फिग सेंटर है। यहाँ पर शुरुआत करने वाले लोग सर्फ स्कूल में सर्फ़िंग के बेसिक्स सीख सकते हैं। मॉरीशस के अधिकांश बीच होटल अपने ग्राहकों को कांप्लिमेंटरी वाटर स्पोर्ट्स सुविधा मुहैय्या कराते हैं। स्कूबा डाइविंग, पैरासेलिंग और डीप सी फिशिंग अतिरिक्त लागत पर उपलब्ध है। हर प्रकार का अनुभव एक साथ पाकर मैं तो बस रोमांचित होता चला गया। एक सप्ताह कैसे कटे कुछ पता ही नहीं चला।

तीन दिन तक लगातार दिन में घूमना हुआ और रात्रि में काव्य गोष्ठियाँ। वाकई ऐसी सुखद अनुभूति मुझे कभी नहीं हुयी थी। एक दिन हम सबको पोर्ट लुइस और नार्थ के आकर्षक 360 डिग्री नज़ारे के लिए 812 मीटर ऊँचाई पर जाने का अवसर मिला। यहाँ से पोर्ट लुई शहर को देखना वाकई बहुत अद्भुत था। स्थानीय वनस्पति, पक्षियों और वन्य जीवन देखने के लिए हम ब्लैक रिवर भी गए। राजधानी पोर्ट लुइस में ख़ूबसूरत औपनिवेशिक शिल्पकला के उदाहरण देखने को मिला। पोर्ट लुइस के चहल-पहल वाले सैंट्रल मार्केट, द कॉडन वाटरफ्रंट के क्रॉफ्ट मार्केट और शॉपिंग सेंटरों की सैर आज भी मेरी स्मृतियों में कैद है।

मॉरीशस का मौसम जादुई है। यहाँ अक्सर यह होता है कि यह एक क्षेत्र में बारिश और दूसरे क्षेत्र में सूर्य शानदार ढंग से केवल कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर चमकता है। ऐसा दृश्य मुझे लगातार मॉरीशस प्रवास में देखने को मिला। गाइड पूनम ने बताया कि मॉरीशस की जनसंख्या में लगभग 52 प्रतिशत हिन्दू हैं। अफ़्रीका महाद्वीप में सबसे ज्यादा। जाहिर है, स्थानीय राजनीति, समाज और संस्कृति पर उनकी प्रधानता होगी ही। मॉरीशस के हिंदुओं में शैवों की संख्या सर्वाधिक है। यही वजह है कि यहां शिव के मन्दिरों की बहुतायत है। 

मॉरीशस के उत्तरी भाग में स्थित महेश्वरनाथ मन्दिर जो ट्रायोलेट शिवाला के नाम से भी चर्चित है, भी गंगा तालाब से कम प्रसिद्ध नहीं है। वास्तव में यह मंदिर दो सदियों से मॉरीशस में हिंदू पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है। पूर्वी मॉरीशस में एक मनोरम द्वीप पर अत्यंत दर्शनीय सागर शिव मंदिर है। चारों तरफ से आती समुद्री लहरों और समुद्री हवाओं के बीच फहराता हुआ सागर शिव मंदिर का ध्वज मानो उद्घोष कर रहा हो कि मॉरीशस में भारतीयता और अध्यात्म की कीर्ति पताका हमेशा ऊंची रहेगी। मॉरीशस के मंदिरों की एक खास बात है। भले ही मंदिर का प्रधान देवता कोई भी हो, दर्जनों दूसरे देवताओं की मूर्तियां भी रहेंगी। ऐसा इसलिए ताकि हर आस्था के व्यक्ति को अपने आराध्य के दर्शन हो जाएं। वैसे यहां के भारतवंशियों के घरों में भी मंदिर होना अनिवार्य है और ये मंदिर हैं हनुमान के।

चलिये अब बात करते हैं अंतरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव की। आखिरी दो दिन यानी छ: और सात सितंबर को हमारा समूह पूरी तरह हिंदीमय रहा। दिनांक: 06.09.2018 को हम जिस होटल में रह रहे थे, :यानी ले ग्रां ब्ले होटल के सभागार में माॅरीशस के कई साहित्यकारों यथा डाॅ0 रामदेव धुरन्धर, श्री राज हीरामन, श्री यानतु देव बुद्धू, श्री धनराज शंभू, श्री टहल रामदीन और श्रीमती कल्पना लालजी की सार्थक उपस्थिती रही। श्रीमती कुसुम वर्मा ने सरस्वती वन्दना किया। श्री शिवपूजन शुक्ल ने गणपति वन्दना किया। इस दिन परिचर्चा का विषय ‘हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य के निर्माण में साहित्यकारों की भूमिका’ था। श्री राज हीरामनि (माॅरीशस) ने विषय परिवर्तन किया। हमारे साथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अन्त में डाॅ0 रामदेव ‘धुरन्धर’ ने कार्यक्रम के सापेक्ष्य अध्यक्षयीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। यहीं इस सत्र का समापन हो गया। अगला सत्र भोजपुरी और अवधी बोलियों के प्रभाव पर चला। इसकी अध्यक्षता श्री जगदीश पीयूष (भारत) ने किया विषय प्रवर्तन डाॅ0 रमाकान्त कुशवाहा ने किया। संचालन डाॅ0 रामबहादुर मिश्र ने किया। अनेक वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किये। अन्त में पीयूष जी ने अध्यक्षयीय वक्तव्य से सत्र का समापन किया। तत्पश्चात सभी लोगों ने होटल में पहुँचकर मध्याह्न भोजन किया। अन्त में गजल संध्या का आयोजन किया गया।

दिनांक: 07.09.2018 का कार्यक्रम हिन्दी भवन लांग माउंटेन माॅरीशस में आयोजित हुआ। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रामदेव ‘धुरंधर’ ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में उच्चायुक्त अभय ठाकुर उपस्थित थे। साहित्यकारों को अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव सम्मान का वितरण अध्यक्ष, मुख्य अतिथि के साथ माॅरीशस के साहित्यकारों एवं सचिवालय माॅरीशस के सम्माननीय महासचिव प्रो0 विनोद कुमार मिश्र व हिन्दी प्रचारिणी सभा के प्रधानमंत्री यन्तुदेव बुद्धू आदि मंच पर उपस्थित थे। इस अवसर पर भारत और मॉरीशस के लगभग चालीस विभूतियों का सम्मान हुआ। इस अवसर मुझे श्रीमती आभा प्रकाश की भारतीय कसीदाकारी और श्रीमती कुसुम वर्मा के परम्परागत भारतीय त्योहारों की कला-प्रदर्शनी के साथ साथ डॉ अर्चना श्रीवास्तव की विचार वीथिका ने खूब आकर्षित किया। डॉ प्रतिमा वर्मा, कुसुम वर्मा और रजिवा प्रकाश का अभिनय शानदार था। श्री सागर त्रिपाठी के संचालन में इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन ने सचमुच पूरी यात्रा को आयामीत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम की समाप्ति पर श्री यान्तु देव बुधु और श्री टहल जी अत्यंत भावुक हो गये, उनकी भावुकता को देखकर यह अबोध बालक अत्यंत भावुक हो गया।

दिनांक: 08.09.2018 को पूरा शहर घूमते हुये हम सभी अपने गंतव्य को प्रस्थान कर गए। इस भ्रमण की सबसे बड़ी उपलब्धि रही अनेकानेक नए नए मित्रों से मुलाकात और उनकी आत्मीयता को आत्मसात करने का एक विशेष मौका।
-गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
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