() माला चौबे
भारतीय पाक शैली ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास को भी आकार दिया है। भारत और यूरोप के बीच मसाले के व्यापार के बारे में अक्सर इतिहासवेत्ताओं द्वारा यूरोप के खोज के युग के लिए प्राथमिक प्रेरक के रूप में बताया जाता है। उस समय मसाले भारत से लाए जाते थे तथा यूरोप और एशिया में उनका व्यापार किया जाता था। यही कारण है कि इसने पूरे विश्व की अन्य पाक शैलियों को भी प्रभावित किया है, विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशिया, ब्रिटिश टापुओं एवं कैरेबियन की पाक शैलियों को। 

जिस तरह खाद्य के प्रभाव भारत से चलकर दूसरे देशों में पहुंचे, उसी तरह भारतीय पाक शैली भी विदेशों में पहुंची। खास-खास व्यंजनों ने लोकप्रियता हासिल की या मसालों के माध्यम से बारीक प्रभाव दुनियाभर की पाक शैलियों में प्रवेश कर गए। 

जहां तक मॉरीशस का प्रश्न है, तो यहाँ के रग रग में बसी है भारतीय पाक शैली की अंतरात्मा। भारत की तरह ही मॉरीशस में भी जड़ी बूटियां और मसाले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मसाले का अभिप्राय अनेक मसालों के मिश्रण से है जो व्यंजन के अनुसार अलग-अलग होता है। यहाँ के व्यंजन में गरम मसाला सबसे महत्वपूर्ण मिश्रण है और मॉरीशसीय प्रिपरेशन का अत्यंत आवश्यक अंग है। जबकि यहाँ मसालों एवं जड़ी-बूटियों की भूमिका केवल पकाने तक ही सीमित नहीं है। इसका प्रयोग आयुर्वेदिक रोगहर एवं निदान के लिए भी होता है। उत्तर भारतीय हिंदुओं की बड़ी आबादी के अलावा मॉरीशस में मुसलमान भी हैं। इनके पूर्वज भी 19वीं सदी के शुरुआती दिनों में मजदूरी करने मॉरीशस गए थे और मोटे तौर पर ये लोग भी उत्तर भारत के ही हैं। इनके अलावा थोड़े से लोग महाराष्ट्र, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश के भी हैं। 

यही कारण है, कि मॉरीशस में मुख्यतः उत्तर भारत के मशहूर शाकाहारी भोजन मसलन दाल, भात, रोटी, चोखा, सब्जी, सलाद, रायता आदि के अलावा मुगलई का सर्वाधिक प्रयोग होता है तथा मोटे तौर पर इसमें प्रयुक्त सामग्री गैर शाकाहारी होती है। इस पाक शैली की विशेषता यह है कि इसमें दही, तली हुई प्याज, गिरी एवं केशर का प्रयोग होता है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें जिन मसालों का प्रयोग किया जाता है उन्हें तलने की बजाय उबाला जाता है जिससे अनोखा एवं भिन्न फ्लेवर एवं खुशबू प्राप्त होती है। यहाँ की पंजाबी पाक शैली अन्य पाक शैलियों से कुछ विशेष अलग नहीं है। मा की दाल, सरसों दा साग और मक्की दी रोटी, मीट करी जैसे कि रोगन जोश और भरे हुए परांठे भी यहाँ के कुछ लोकप्रिय व्यंजन हैं। भोजपुरी और अवधी भाषी लोगों की बहुलता के कारण यहाँ अवध के बावर्चियों एवं रकाबदारों ने खाना पकाने की दम शैली को भी जन्म दिया है। दम अर्थात धीमी आंच पर एक बड़े हांडी एवं कुकिंग में खाद्य पदार्थों को बंद करने की कला जो इस क्षेत्र के लोगों के आराम परस्त दृष्टिकोण एवं नजरिए से बहुत अच्छी तरह संबंधित है। 

मॉरीशस में अवध पाक शैली की समृद्धि न केवल पाक शैली की विविधता में है अपितु प्रयोग की गई सामग्रियों में भी है जैसे कि मटन, पनीर और समृद्ध मसाले जिसमें इलायची और केशर शामिल हैं। यहाँ की प्रमुख फलाहारी व्यंजनों में प्रमुख है कच्चे केले के दहीबड़े, साबूदाना टिक्की, अरबी की चाट और चटपट रबड़ी आदि है, जबकि स्वस्थ व्यंजन में बिना तले दही बड़े, अंकुरित दाल के शोरबेदार कोफ्ते, दही से बना स्वादिष्ट चीज स्प्रेड, चटपटी चीज टिकियाँ, बिना चिकनाई के रसेदार आलू मटर, माइक्रोवेव में पके भरवाँ बैंगन और हरे प्याज और मटर, गाजर के साथ खाने का अपना एक अलग अंदाज है। 

साहित्य, संगीत और कला सभी पर समान अधिकार रखनेवाली मॉरीशस की निवासी मधु गजाधर रेडियो व टीवी की दुनिया का एक जाना माना नाम हैं। अपनी बहुमुखी प्रतिभा के कारण घर घर में लोकप्रिय वे मॉरीशस टीवी पर भारतीय संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम पिछले अनेक वर्षों से प्रसारित करती रही हैं, जिसमें व्यंजन विधियों से सौदर्य सुझावों तक सबकुछ शामिल रहता है। भारतीय प्रवासियों ने मॉरीशस की रसोई की परंपराओं का व्यापक विस्तार किया है। इन पाक शैलियों को स्थानीय स्वाद के अनुसार अनुकूलित किया गया है तथा स्थानीय पाक शैलियों को इन्होंने प्रभावित भी किया है। उदाहरण के लिए, करी यहाँ के आकर्षण का केंद्र है। भारत के तंदूरी व्यंजन जैसे कि चिकन टिक्का को बड़े पैमाने पर यहाँ लोकप्रियता प्राप्त है। जबकि यहाँ शाकाहार के प्रसार का श्रेय अक्सर हिंदू एवं बौद्ध लोगों को दिया जाता है जिसका जन्म भारत में हुआ। 

मॉरीशस के व्यंजन पर्यटकों के मन को लुभा लेते हैं। यहाँ के व्यंजनों में काफी विविधता है। यहाँ पर मुख्य रूप से क्रिओल, फ्रेंच तथा चायनीज लोग रहते हैं तथा इसी सांस्कृतिक मिश्रण का प्रभाव व्यंजनों पर दिखाई देता है। मॉरीशस में आने वाले कई उपनिवेशवादियों की पाक परंपराओं ने यहाँ अवशोषित किया है। आप यहाँ एक असली फ्रांसीसी भोजन का आनंद ले सकते हैं-सबायोन, शातिनी और अन्य सॉस हर जगह उपयोग किए जाते हैं। यदि आप असली अफ्रीकी एक्सोटिक्स चाहते हैं तो मसालों के साथ बटाटा, सैंडविच ‘‘पुरी‘‘ और मेडागास्कर से लाए गए दासों के वंशजों की अन्य जलती हुई प्रसन्नताएं आपकी स्मृति में लंबे समय तक रहेंगी। यहां भारतीय और दक्षिण-पूर्वी व्यंजन भी लोकप्रिय हैं। 

स्थानीय निवासियों की मेज पर हमेशा मछली, समुद्री भोजन और विभिन्न प्रकार के फल होते हैं। उत्तर भारतियों की पसंद जैसे पापड़ी चाट, मिक्स चाट, टिक्की चाट, समोसा चाट, लिट्टी-चोखा समेत साउथ इंडियन व्यंजन डोसा, इडली आदि का भी यहाँ प्रचलन है। 

आप यहाँ भारतीय, चीनी, गरौल और यूरोपियन व्यंजन का स्वाद चख सकते है। यहाँ पिली मटर की दाल, भरे हुए पुरीओ आलूदम के साथ नाश्ते में ग्रहण कर सकते है। सब्जी व फल की सभी किस्मे यहाँ मिल जायगी और वो भी एकदम ताजा। हर तरह के भारतीय व्यंजन यहां हर जगह आसानी से मिल जाते हैं। हालांकि शाकाहारी भोजन को पकाए जाने का वहां का तरीका भारत से भिन्न है और इसीलिए वहां के भोजन में एक अलग तरह का स्वाद भी मिलता है। यूरोपीय और चीनी भोजन भी वहां कई जगह आसानी से मिल जाते हैं। 

पोर्टलुई में भारतीयों के लिए आकर्षण एक बड़ा कारण यह भी है कि यहां अधिकतर लोग हिंदीभाषी हैं। वैसे हिंदी मॉरिशस के अन्य शहरों और गांवों में भी बोली जाती है।
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