देशराग'

दिव्य धरा है ये भारत की,
राष्ट्रवीरों की जननी।
कण-कण श्रम पल्लवित
वीर पुष्प जहाँ खिले
वेदों,गीता से निसृत वाणी
फ़िजाओं में जहाँ घुली मिली।
भगत,सावरकर,विवेकानंद,शिवाजी
सच्चे युवा हस्ताझर भारत के
गाँधी,सुभाष,टैगोर, आज़ाद
प्रेरक सत्य पथ के।
हिमशिखरों से अटल सशक्त
ये देशभक्त,देशप्रेम से अनुरक्त
इतिहास के पन्नों पर जगमगाते हैं
वर्तमान को राह दिखाते हैं।
सिर्फ़ पठन- पाठन का विषय नहीं
इस पुण्य धरा का सौभाग्य
मातृ-भक्तों के त्याग, शौर्य से सिंचित
चिरंतन प्रवाह है ये 'देशराग’।

-अनुपमा श्रीवास्तव 'अनुश्री'

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