छाया (मराठी कहानी)
नीलकंठ नांदुरकर अपनी ही लिखी कहानी की अंतिम पंक्तियाँ—‘और वह शून्य में नजरें लगाए खिड़की से बाहर देखती रही।’ वैसे ही छाया खिड़की से बाहर दे...
छाया (मराठी कहानी)
नीलकंठ नांदुरकर अपनी ही लिखी कहानी की अंतिम पंक्तियाँ—‘और वह शून्य में नजरें लगाए खिड़की से बाहर देखती रही।’ वैसे ही छाया खिड़की से बाहर दे...
यात्रा वृतांत : पांच पांडवनी
मई, जून की गर्मी से कुछ दिन बचने के लिए नैनीताल का प्रोग्राम बना लिया। सारी तैयारी करके चल दिए। हल्द्वानी पहुंचते ही राहत सी महसूस होने लगी ...
लघु कथा: कॉफ़ी कैफ़े
लगभग बीस साल बाद तीन पुरानी सहेलियाँ— नीलू, रेखा और कविता कॉफ़ी कैफ़े में मिलीं। कॉलेज के दिनों की मस्ती याद करते-करते बात अचानक पतियों पर आ...
कहानी: तलाश
रीता जी एक बैंक में कैशियर के पद पर कार्यरत थीं। पति एक मल्टीनेशनल कंपनी में जनरल मैनेजर और दो बच्चे – बेटा बीटेक के फाइनल ईयर में, बेटी एमब...
छला समर्पण (एक सच्ची कहानी)
यह कहानी खुली छोड़ दी गई है, ताकि पाठक सोच सके — क्या कभी छोटे भाई, माता- पिता और बहनें उस त्याग को समझेंगे? या यह भी एक ऐसी कहानी होगी, जो ...
लघुकथा: “सूखे धागे”
लेखक: डॉ. सत्यवान सौरभ शहर की सबसे ऊँची इमारत के चौदहवें माले पर स्थित अपने कार्यालय में बैठा राजीव कंप्यूटर स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठा था,...
कहानी : अमर प्रेम
- डॉ रवीन्द्र प्रभात नौकरी छोड़ने के बाद मैं गाँव आ गया। वहां के एक स्थानीय अखबार में कॉलम लिखने लगा। मेरा कॉलम काफी चर्चित हुआ और मेरी इच्छ...
हवालात कै रात
अवधी किहानी- - प्रदीप महाजन राम लखन अउर रामदुलारे दुइ सगे भाय, एक पुरवा मइहां अपनी महतारी साथे रहत रहैं। जब लरिका छोटि-छोटि रहैं तब्बै उनके ...
अधूरी कहानी
अधूरी कहानी ========= राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित एक कहानी प्रतियोगिता में इस बार निर्णायक मंडल ने अरुण कुमार की कहानी को चुना था। प्...
कहानी: जीने की कला
दादा जी नमस्कार ! घर के छज्जे पर बैठे दादाजी ने नीचे देखा तो कुछ बच्चे खड़े थे. कोई हाफ पेंट पहने तो कोई टीशर्ट और फुलपेंट में. एक ...