नई दिल्ली [एजेंसियां] :भारतीय राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद वर्तमान में मॉरीशस के दौरे पर हैं। एक दिन पहले ही मॉरीशस पहुंचे रामनाथ कोविंद और उनकी धर्मपत्नी ने गंगा तलाव पर प्रार्थना की। मॉरीशस की आजादी के 50वां साल पूरा होने के मौके पर आयोजित समारोह में राष्‍ट्रपति कोविंद बतौर मुख्‍य अतिथि शामिल होंगे। राष्‍ट्रपति के साथ केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, दिल्‍ली भाजपा अध्‍यक्ष एवं सांसद मनोज तिवारी, हुकुम देव नारायण यादव, आर राधाकृष्‍ण, विजय सत्‍यनाथ, भरत लाल, रुचि घनश्‍याम, जयदीप मजूमदार और मनोज यादव भी सफर पर गए हैं।

आज मॉरीशस की आजादी की स्वर्ण जयंती: 

अफ्रीका महाद्वीप का देश मॉरीशस आज अपनी आजादी की स्वर्ण जयंती मना रहा है। मॉरीशस को औपनिवेशिक शासन से आज़ादी दिलाने में भारतीय मूल के सर शिवसागर रामगुलाम ने अगुआई की थी। मॉरीशस के नेताओं ने अपनी आजादी का दिन 12 मार्च का इसलिए चुना, क्योंकि उनके जेहन में अपनी आजादी के संघषों के प्रेरणास्त्रोत महात्मा गांधी और उनके द्वारा 12 मार्च 1930 को निकाला गया दांडी मार्च था। गन्ना खेती मॉरीशस की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है और जब 1834 में दास प्रथा की समाप्ति के बाद वहां गन्ना खेती के लिए मजदूरों की किल्लत हुई तब वहां की अंग्रेजी हुकूमत सस्ती मजदूरी के लिए भारत के गिरमिटिया मजदूरों को मॉरीशस ले गई। 1834 से शुरू हुई यह प्रथा 12 मार्च 1917 को कानूनन बंद हो गई। गिरमिटिया असल में अंग्रेजी शब्द अग्रीमेंट का अपभ्रंश है। अंग्रेज मजदूरों की भर्ती के समय एक अग्रीमेंट करते थे जिसमे उनकी सेवा अवधि 5 वर्ष, मजदूरी की राशि के साथ-साथ वापसी के लिए जहाज के टिकट आदि का प्रावधान था।

भारतीय मजदूरों की पीढ़ियाँ: 

17वीं और 18वीं सदी में आए मजदूरों की पीढि़यों ने हिंदू धर्म, भाषा, पहनावा तथा रहन−सहन भारतीय परंपरा के अनुसार ही रखा। मारीशस में वैसे अब नई पीढ़ी आधुनिक पोशाक जींस वगैरह पहनने लगी है लेकिन गांवों में आज भी बड़े−बूढ़े साड़ी और कुर्ता−धोती को ही महत्व देते हैं। स्कूलों में भोजपुरी वर्नाकुलर के रूप में अनिवार्य है। यहां की बोलचाल की भाषा क्रेओल है जो फ्रेंच, अंग्रेजी और भोजपुरी भाषा के मिश्रण से बनी है।

आज भी लोग याद करते हैं कि कैसे लोग किन गांवों से वहां गये. बहुत स्पष्ट तो नहीं, पर बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि उनके दादा-परदादा कहते थे कि आरा के निकट कई गांवों से लोग परदेश जाते थे। हरिगांव जो हाल में चर्चित रहा, वह भी इसी इलाके में पड़ता है. बिहिया, बेलबनिया, सलेमपुर इलाकों में कई गांव हैं, जहां से लोगों के बाहर जाने की बात कही जाती है।

मॉरीशस ने 1968 में स्वतंत्रता प्राप्त की और देश राष्ट्रमंडल के तहत, सन्1992 में एक गणतंत्र बना। मॉरीशस एक स्थिर लोकतंत्र है जहाँ नियमित रूप से स्वतंत्र चुनाव होते हैं और मानवाधिकारों के मामले में भी देश की छवि अच्छी है, इसके चलते यहाँ काफी विदेशी निवेश हुआ है और यह देश अफ्रीका में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में से एक है।

मॉरीशस एक संसदीय लोकतंत्र: 


मॉरीशस एक संसदीय लोकतंत्र है जिसकी संरचना ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली पर आधारित है। राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है जिसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और उसका चुनाव राष्ट्रीय सभा, मॉरीशस की एकसदनीय संसद करती है। राष्ट्रीय सभा (नेशनल असेंबली) के 62 सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं जबकि चार से आठ सदस्यों की नियुक्ति चुनाव में हारे "श्रेष्ट पराजित" उम्मीदवारों के बीच से जातीय अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने के लिये तब की जाती है जब इन समुदायों को चुनाव से उचित प्रतिनिधित्व ना मिला हो। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद सरकार का नेतृत्व करते हैं। सरकार पांच साल के आधार पर निर्वाचित होती है। सबसे हाल के आम चुनाव 3 जुलाई 2005 में मुख्य भूमि के सभी 20 निर्वाचन क्षेत्रों के साथ ही रॉड्रीगज़ द्वीप के निर्वाचन क्षेत्र में भी कराये गये थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों में, मॉरीशस हिंद महासागर आयोग, दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय, राष्ट्रमंडल और ला फ्रेंकोफोनी (फ़्रांसीसी बोलने वाले देशों) का हिस्सा है। सन् 2006 में, मॉरीशस को पुर्तगाली भाषाई देशों के समुदाय का एक प्रेक्षक सदस्य बनने को कहा गया जिससे यह उन देशों के और करीब हो सके। मॉरीशस की कोई सेना नहीं है, लेकिन इसके पास एक तटरक्षक बल तथा पुलिस और सुरक्षा बल हैं।

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