संयुक्त राष्ट्र, 21 फरवरी (भाषा) : संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष मिरोस्लाव लायसक ने भारत की एक परियोजना का हवाला देते हुये कहा कि वैश्विक जल संकट की कमी को दूर करने के लिये दुनिया को विज्ञान की जरूरत है। भारत में एक परियोजना के तहत किसान सिंचाई के लिये भूजल का इस्तेमाल करने के लिये सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों का प्रयोग हो रहा है। 

लायसक ने कल कहा कि सतत विकास के एजेंडा 2030 आह्वान करता है कि सभी के लिये पानी और साफसफाई की सुविधा इस समय तक उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि सतत विकास के सभी लक्ष्यों को हासिल करने के लिये पानी बेहद अहम है लेकिन वैश्विक नेता इस दिशा में पर्याप्त काम नहीं कर रहे हैं। 

यूनेस्को और ‘ज्वाइंट रिसर्च सेंटर ऑफ द यूरोपियन कमीशन’ द्वारा आयोजित ‘जल के लिए विज्ञान’ सम्मेलन को संबोधित करते हुये लायसक ने कहा, ‘‘हमें समाधान के लिये विज्ञान की जरूरत है। विज्ञान अब इस गणना में हमारी मदद करता है कि जनसंख्या वृद्धि और जलवायु परिवर्तन कैसे पानी की उपलब्धता को प्रभावित करेगा। 

बाढ़ के पूर्वानुमान में मदद करने के लिये नदियों की धारा बदलने पर नजर रखने में भी यह मदद करता है। भारत में एक परियोजना चल रही है जहां किसान फसलों की सिंचाई के लिये सौर ऊर्जा के पंपों का इस्तेमाल करते हैं।’’

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